रांची : झारखंड सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन और कुक्कुट पालन को बढ़ावा देने की तैयारी में है। कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के पशुपालन निदेशालय ने मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत विभिन्न योजनाओं के संचालन के लिए एजेंसियों, गैर सरकारी संस्थाओं और एफपीओ से आवेदन मांगे हैं। इसके तहत बकरी, सुअर, भेड़, मुर्गी और बत्तख पालन से जुड़ी इकाइयों को शामिल किया गया है।
बकरी से लेकर बत्तख पालन तक की योजनाएं
- बकरा विकास योजना: ब्लैक बंगाल नस्ल के 2 नर और 8 मादा, यानी कुल 10 बकरा-बकरी की एक इकाई के लिए 42,000 रुपये अनुमानित खर्च निर्धारित है। इस योजना के तहत 12,516 इकाइयों का लक्ष्य रखा गया है।
- सूकर विकास योजना: उन्नत नस्ल के 5 सूकरों, जिसमें 1 नर और 4 मादा शामिल हैं, की एक इकाई के लिए 34,000 रुपये का प्रावधान है। इसके तहत 3,114 इकाइयों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
- भेड़ पालन योजना: छोटानागपुरी और शाहवादी नस्ल के कुल 10 भेड़-भेंडी, यानी 2 नर और 8 मादा, की एक इकाई के लिए 42,000 रुपये अनुमानित लागत तय की गई है। इसका लक्ष्य 2,257 इकाइयां है।
- बैकयार्ड लेयर कुक्कुट योजना: 420 चूजों की एक इकाई के लिए 14,700 रुपये का बजट निर्धारित है। इसमें 5 प्रतिशत मॉर्टेलिटी को भी ध्यान में रखा गया है। इस योजना के तहत 2,984 इकाइयों का लक्ष्य है।
- ब्रायलर कुक्कुट पालन योजना: 525 ब्रायलर चूजों की एक इकाई के लिए 15,750 रुपये की अनुमानित लागत तय की गई है। इसके तहत सबसे अधिक 5,407 इकाइयों का लक्ष्य रखा गया है।
- बत्तख चूजा वितरण योजना: 15 दिन की उम्र वाले 30 लो-इनपुट बत्तख चूजों की एक इकाई के लिए 3,060 रुपये का खर्च निर्धारित है। इस योजना का लक्ष्य 21,482 इकाइयां है।
पशु-पक्षियों की स्वास्थ्य जांच होगी जरूरी
योजना के तहत लाभुकों तक पहुंचाए जाने वाले पशु-पक्षियों की गुणवत्ता और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की व्यवस्था की गई है। उपलब्ध शर्तों के अनुसार बकरा-बकरी, भेड़ और सूकर को सप्लाई से पहले 15 दिनों तक क्वारंटाइन में रखा जाना होगा। इसके बाद आवश्यक टीकाकरण कराया जाएगा। इनमें बकरियों के लिए पीपीआर और सूकरों के लिए स्वाइन फीवर जैसे रोगों से बचाव के टीके शामिल हैं। इसके साथ पशु चिकित्सक का स्वास्थ्य प्रमाणपत्र भी जरूरी होगा।
रास्ते में पशु की मौत हुई तो सप्लायर की जिम्मेदारी
योजना की शर्तों के मुताबिक सप्लाई से पहले या परिवहन के दौरान किसी पशु-पक्षी की मौत होने पर उसकी जिम्मेदारी संबंधित सप्लायर की होगी। ऐसी स्थिति में सप्लायर को मृत पशु-पक्षी के स्थान पर नया पशु-पक्षी उपलब्ध कराना होगा।इससे लाभुकों तक स्वस्थ और निर्धारित मानकों वाले पशु-पक्षी पहुंचाने पर जोर दिया गया है।
लाभुक के घर की दीवार पर भी होगा विवरण
सप्लायर की जिम्मेदारी केवल पशु-पक्षी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेगी। चयनित लाभुक के घर की दीवार पर योजना का विवरण और लाभुक का नाम भी निर्धारित बजट के भीतर अंकित कराने की शर्त रखी गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य योजना के लाभार्थियों और इकाइयों की पहचान को सार्वजनिक रूप से दर्ज करना बताया गया है।
एक सप्लायर को अधिकतम चार जिले
योजना के तहत एक सप्लायर को अधिकतम चार जिलों का आवंटन किया जा सकता है। साथ ही सप्लायर के लिए बत्तख चूजा वितरण योजना में भाग लेना अनिवार्य रखा गया है। यानी किसी सप्लायर को बकरी, सुअर, भेड़ या कुक्कुट पालन से जुड़ी योजना का काम मिलने की स्थिति में बत्तख चूजा वितरण की जिम्मेदारी भी निभानी होगी। मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत अब आवेदन प्रक्रिया और चयन के बाद संबंधित योजनाओं को अलग-अलग जिलों में लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।




