रांची: नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (NUSRL), रांची में शनिवार को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए भव्य ओरिएंटेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बी.ए. एलएल.बी. (ऑनर्स), बी.बी.ए. एलएल.बी. (ऑनर्स) और एलएल.एम. पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने वाले छात्रों का स्वागत किया गया। इस अवसर पर झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति न्यायमूर्ति महेश शरदचंद्र सोनक मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
शिक्षा का उद्देश्य सही सोच और विवेक विकसित करना
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश महेश शरदचंद्र सोनक ने महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल जानकारी हासिल करना नहीं, बल्कि व्यक्ति में सही सोच, विवेक और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और तकनीक का है, लेकिन मानवीय संवेदनाएं, मूल्य और विवेक किसी भी तकनीक से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा, “आपकी सोच आपकी भाषा बनती है, भाषा आपका कर्म बनती है, कर्म आपकी आदत बनता है, आदत आपके मूल्य बनाती है और यही मूल्य आपकी मंजिल तय करते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा संकीर्ण सोच को व्यापक बनाती है और जीवन के हर अनुभव से सीखना व्यक्ति को मजबूत बनाता है।
कानून का पेशा समाज सेवा का माध्यम
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों का स्वागत करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा उत्तीर्ण कर यहां तक पहुंचना छात्रों की मेहनत और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्राप्त करने का केंद्र नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण की प्रयोगशाला है। कानून के पेशे को समाज सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को निरंतर अध्ययन, अनुशासन और आत्मविकास पर ध्यान देने की सलाह दी।
सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती: रोहितश्य रॉय
विशेष अतिथि और झारखंड सरकार के महाधिवक्ता रोहितश्य रॉय ने अपने छात्र जीवन और वकालत के शुरुआती अनुभव साझा करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय जीवन में बनने वाले मित्र भविष्य में पेशेवर जीवन के महत्वपूर्ण सहयोगी बनते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षकों, वरिष्ठों और साथियों से अधिक से अधिक सीखने की सलाह देते हुए कहा कि सीखने की प्रक्रिया जीवनभर चलती रहती है।
विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है NUSRL
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि वे अपने जीवन के एक महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने छात्रों से आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और उपलब्ध अवसरों का पूरा लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि NUSRL में विभिन्न शैक्षणिक केंद्रों, समितियों और गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों की नेतृत्व क्षमता, व्यक्तित्व विकास और पेशेवर कौशल को निखारने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
बौद्धिक संपदा अधिकार विषयक पुस्तक का लोकार्पण
कार्यक्रम के दौरान बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) विषय पर आधारित एक पुस्तक का भी लोकार्पण किया गया। इस पुस्तक का संपादन और लेखन कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल, प्रो. (डॉ.) के. श्यामला कंडाडई और प्रो. (डॉ.) एम.आर. श्रीनिवास मूर्ति के नेतृत्व में किया गया है।
विद्यार्थियों को दिखाई गई विशेष परिचयात्मक फिल्म
नवप्रवेशित छात्रों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, शोध और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों से परिचित कराने के लिए एक विशेष परिचयात्मक फिल्म भी प्रदर्शित की गई। फिल्म का निर्माण विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार पाठक ने किया है।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के डीन, संकाय सदस्य, अधिकारी, कर्मचारी, नवप्रवेशित विद्यार्थी और उनके अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। ओरिएंटेशन कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण विधि शिक्षा, नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ अपने शैक्षणिक जीवन की शुरुआत करने का संदेश दिया गया।




