शहर से 20 किलोमीटर दूर हरियाली से घिरा माराशिली पहाड़, चाेटी पर मौजूद है प्राचीन शिवलोक धाम, 8 कुंड और गुफा

शहर से 20 किलोमीटर दूर हरियाली से घिरा माराशिली पहाड़, चाेटी पर मौजूद है प्राचीन शिवलोक धाम, 8 कुंड और गुफा
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– लॉकडाउन में बंद हुए पर्यटन स्थल तो यहां आ कर समय व्यतीत करते नजर आते हैं शहर के युवा
– हर वीकेंड पर पहुंचते हैं हजाराें लाेग

रांची से करीब 15 किलोमीटर दूर रामपुर बजार से लगभग 4 किलोमीटर के अंदर जाने पर राजा उलातू पंचायत का उनिडीह गांव है। इसी गांव के पास मौजूद है माराशिली पहाड़ जो इन दिनों शहर के युवाओं के खास हैंगआउट जोन में शामिल हाे गया है। माराशिली पहाड़ 230 एकड़ में फैला हुआ है। यह एक तरफ से खेतों से तो एक तरफ से घने पेड़ों से घिरा हुआ है। इसकी चाेटी पर एक प्राचीन मंदिर मौजूद है जो शिवलोक धाम के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर की जो दीवार हैं वह लगभग 4 फीट चाैड़ा है। मंदिर के अलावा इस पहाड़ में 8 छोटे-बड़े कुंड हैं। यहां जो सबसे बड़ा कुंड है उसके बारे में स्थानीय लोगों ने बताया कि आज तक इस कुंड का पानी कभी नहीं सुखा है। एक बार इसकी गहराई को नापने के लिए इसमें सात खटिया का रस्सी भी डाला गया लेकिन गहराई का पता नहीं चल पाया। इसके अलावा इसमें एक गुफा भी है।

 

प्रचलित है कई कथाएं
यहां मौजूद मंदिर को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि एक बार महर्षि बाल्मीकी यहां से गुजर रहे थे। यहां रूक कर तप करने लगे, राम राम का जप कर रहे थे। लोगों को लगा मरा-मरा बोल रहे हैं। उसी समय से इस पहाड़ काे माराशिली कहा जाने लगा। इसके अलावा भी इस पहाड़ व मंदिर से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं।

एक गुफा है मौजूद

पहाड़ के दाहिने ओर एक गुफा मौजूद है। इसकी लंबाई 12 फीट, चौड़ाई 8 फीट व उंचाई लगभग 8 से 10 फीट है। यहां का वातावरण गर्मी के मौसम में ठंढ व ठंढ के मौसम में गरम रहता है।

धार्मिक व पर्यटन स्थल के रूप में हो सकता है विकसित

शिवलोक धाम माराशिली पहाड़ ट्रस्ट के अध्यक्ष दयानंद राय ने बताया कि इस स्थान को धार्मिक व पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। इसके विकास से इस जगह को पहचान मिलेगी साथ ही आस-पास के लोगों को रोजगार भी मिलेगा। कई जनप्रतिनिधि यहां आए और इसे पयर्टन स्थल के रुप में विकासित करने का आश्वासन भी दिए लेकिन आज तक इस पर काेई काम नहीं हुआ है। यहां शिवरात्रि के दिन मेला लगता है। सावन के महीने में दूर दराज से हजाराें लोग जल चढ़ाने के लिए आते हैं। ट्रस्ट के सदस्य संजय कुमार साहू ने बताया कि यूं तो सालों भर यहां लोग आते हैं लेकिन कुछ महिनों से लोगों का आना जाना बढ़ा है। युवाओं के फेवरेट हैंगआउट जाेन में तो यह शामिल हाे ही चुका है फैमिली वालों का भी यह वीकेंड में समय बिताने का पसंदीदा स्थल बन चुका है।

रखें ध्यान
माराशिली पहाड़ की बनावट इस तरह है कि बाइक व कार उपर तक चला जाता है। लेकिन उपर जाने के लिए कोई पक्का रास्ता नहीं है, इसलिए गाड़ी लेकर उपर जाने में खतरा हो सकता है। जो कुंड है वह बहुत गहरा है इसलिए जिसे तैरना नहीं आता हो वह पानी में न उतरें। बाइके से उपर जा रहे हों तो किसी प्रकार का स्टंट न करें।

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