JEE ADVANCED RESULT 2022: रांची के स्टूडेंट्स का शानदार प्रदर्शन, तीन स्टूडेंट्स टॉप थ्री में

जेईई एडवांस्ड का रिजल्ट को जारी कर दिया गया है। इसमें रांची के स्टूडेंट्स ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। इस बार ऑल इंडिया टॉप 100 रैंक में अपनी जगह बनाने वाले तीनों छात्र रांची से हैं। जिन्होंने आईआईटी भुनेश्वर जोन के टॉप-5 रैंक में भी अपनी जगह बनाई है। इसमें रांची के सूर्यांश सृजन ऑल इंडिया रैंक 51, तनिष अग्रवाल रैंक 57 व आदित्य प्रकाश रैंक 70 शामिल हैं। सूर्यांश सृजन झारखंड टॉपर बने हैं। इनके साथ ही रांची के विकास कुमार ओझा ने 157 रैंक, सक्षम राज ने 323 रैंक, अविरल सिंह ने 455 रैंक, श्लाेक वत्सल ने 1012 रैंक प्राप्त किया है। वहीं छात्राओं में समृद्धि सहाय रैंक 1901 के साथ शहर में अव्वल हैं। टॉपरों ने मनपंसद ब्रांच कंप्यूटर साइंस व मनपसंद संस्थान आईआईटी बांबे को बताया। बताते चलें इस बार जेईई एडवांस्ड की परीक्षा का आयोजन आईआईटी बांबे की ओर से किया गया था। जिसमें झारखंड आईआईटी भुवनेश्वर जोन के अंतर्गत शामिल रहा। परीक्षा 28 अगस्त को आयोजित की गई थी। परीक्षा के लिए झारखंड के 5 शहरों में परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। रांची के दो परीक्षा केंद्रों में लगभग दो हजार स्टूडेंट्स परीक्षा में शामिल हुए थे।

समय के बजाय टॉपिक्स निर्धारित किए-सूर्यांश

सूर्यांश सृजन अपने माता-पिता व बहन के साथ


रांची के सूर्यांश सृजन ऑल इंडिया रैंक 51 के साथ स्टेट टॉपर बने हैं। उन्होंने 12वीं की पढ़ाई डीपीएस रांची से की है। उन्होंने बताया कि कोचिंग व स्कूल के क्लास को उसी दिन आ कर रिवाइज करते थे। समय के बजाय टॉपिक निर्धारित कर पढ़ाई करते रहे। मॉक टेस्ट देकर खुद से मूल्यांकन करते थे, कहीं चूक होती तो उसे ठीक करते थे। एडवांस्ड के लिए रोजाना सात से आठ घंटे पढ़ाई किए। कई बार निराश हुए तो शिक्षकों व घरवालों ने मोटीवेट किया। खुद को रिलेक्स करने के लिए म्यूजिक सुनते या गेम्स खेलते थे। पसंदीदा ब्रांच कंप्यूटर साइंस व पसंदीदा संस्थान आईआईटी बांबे है। उनके पिता डॉ. सुशील कुमार सिंह, रेडिएंट पेन क्लिनिक के डायरेक्टर हैं व मां सुनीता कुमारी फार्मासिस्ट हैं।

टीप्स- निरंतर पढाई करें, क्लास व कोचिंग के पढाई को उसी दिन रिवाइज कर लें। पहले पढ़े हुए टॉपिक्स को भी समय समय पर रिवाइज करें।

परीक्षा से पहले हर दिन एक टेस्ट पेपर बनाते- तनिष

तनिष अग्रवाल अपने माता-पिता के साथ

तनिष अग्रवाल ने जेईई एडवांस्ड की परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 57 प्राप्त किया है। वे जेवीएम, श्यामली के छात्र हैं। 12वीं में सिटी टॉपर भी बने थे। उन्होंने बताया कि इस रैंक को हासिल करने में कोचिंग, स्कूल की पढ़ाई ने बहुत मदद की। टॉपिक निर्धारित कर पढ़ाई करते थे। परीक्षा से एक माह पहले हर दिन एक टेस्ट पेपर सोल्व करता था। इस दौरान पिछले 10 साल पूछे गए सवालों को हल किया। मॉक टेस्ट में अच्छे अंक नहीं आने पर कई बार निराश हुआ। ऐसे में शिक्षकों व अभिभावकों ने मोटिवेट किया। एडवांस्ड की तैयारी के लिए रोजाना सात से आठ घुंटे पढ़ाई करता था। उनके पिता विजय कुमार अग्रवाल बिजनेसमैन व मां आशा अग्रवाल होममेकर हैं।

टीप्स- साल भर पढ़ाई करें, पढ़ाई काे परीक्षा से पहले के लिए या कुछ महिनों के लिए ना छोड़ें। पिछले कुछ सालों में पूछे गए सवालों को हल कर परीक्षा को समझ सकते हैं। टेस्ट देते रहें, साथ ही गलतियों का सेल्फ एनालिसिस करें।

लगातार पढ़ाई की, बैकलॉग नहीं रखे- आदित्य

अपने माता-पिता के साथ आदित्य प्रकाश


आदित्य प्रकाश ने जेईई एडवांस्ड की परीक्षा में रैंक 70 प्राप्त किया है। वे डीपीएस रांची के छात्र हैं। उन्होंने बताया कि जेईई केे लिए लगातार पढ़ाई करते रहे। बैकलॉग नहीं रखते थे। टाइम लिमिट में प्रैक्टिस करते रहे। टेस्ट देते व गलतियों से सीखते थे। टॉपिक के अनुसार शेड्यूल बनाते थे। केमेस्ट्री पर ज्यादा ध्यान दिए। पिछले 15 सालों में पूछे गए सवालों को हल किए। पढ़ाई के बीच खुद को रिलेक्स करने के लिए मूवी देखते, सांग सुनते और अपने अभिभावकों से बात करते थे। उनका फेवरेट ब्रांच कंप्यूटर साइंस है। उनके पिता- उत्तम बुधिया व मां सुनीता बुधिया दोनों चार्टेड अकाउंटेंट हैं।

टीप्स- सिलेबस ज्यादा होता है, इसलिए 11वीं से ही तैयारी करें। अपने कमजोरी को खोजिए, उस पर प्रैक्टिस करें। रिवीजन के लिए समय निकालें।

सुर्यांश व आदित्य क्लास दो से हैं अच्छे दोस्त, टॉप रैंकर में बनाई जगह
रांची के सूर्यांश सृजन व आदित्य प्रकाश क्लास दो से अच्छे दोस्त हैं। जिन्होंने टॉप 100 रैंक के साथ-साथ आईआईटी भुवनेश्वर जोन में टॉप 5 रैंक में अपनी जगह बनाई है। सूर्यांश सृजन ने ऑल इंडिया रैंक 51 ताे आदित्य प्रकाश ने रैंक 70 प्राप्त किया है। सूर्यांश ने बताया कि क्लास टू से हम दोनों अच्छे दोस्त हैं। पहले संत थॉमस में साथ पढ़ाई की। इसके बाद डीपीएस रांची में। दोनों सेम क्लास में थे, वहीं एक ही स्कूल बस से सफर करते थे। साथ मिल कर पढ़ाई करते थे। कहीं कुछ डाउट होता तो एक दूसरे से पूछते थे। साथ में कांपिटीशन भी रहता था तो साथ में घूमते फिरते भी थे। कोविड के दौरान विडियो कॉल से भी एक दूसरे के पढ़ाई में मदद करते थे।

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